राजस्थान खनिज नीति 2024


राजस्थान खनिज नीति 2024 एक दूरदर्शी पहल है जिसका उद्देश्य राज्य में टिकाऊ, उत्तरदायी और पारदर्शी खनिज विकास को बढ़ावा देना है। राजस्थान की समृद्ध खनिज संपदा राज्य की आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान कर सकती है, और यह नीति इस क्षमता को पूरी तरह से उपयोग में लाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण को प्राथमिकता देती है।

यह नीति खनिज संपदा के आर्थिक लाभ को अधिकतम करने, निवेश को आकर्षित करने और रोजगार के अवसर सृजित करने पर जोर देती है। साथ ही, यह सतत खनन प्रथाओं को बढ़ावा देती है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और खनन गतिविधियों से प्रभावित समुदायों के साथ न्यायसंगत लाभ-साझेदारी शामिल है।

राजस्थान खनिज नीति 2024 उन्नत तकनीकों को अपनाकर अन्वेषण, संसाधन प्रबंधन और खनिज प्रशासन को बेहतर बनाने का प्रयास करती है। यह नीति नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करके पारदर्शिता को बढ़ाएगी, निवेशकों का विश्वास मजबूत करेगी और औद्योगिक विकास को गति देगी।

इस नीति के माध्यम से हम नए निवेश आकर्षित करने और उन नवाचारों को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहे हैं जो 'राइजिंग राजस्थान समिट 2024' की दृष्टि के अनुरूप हैं। यह नीति 'विकसित राजस्थान' और 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

- भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री, राजस्थान


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अनुक्रमणिका

1. भूमिका


2. पृष्ठभूमि

2.1. खनिज अन्वेषण एवं खोज

2.2. राजस्थान में प्रमुख खनिज

2.3. राजस्थान में लघु खनिज

2.4. राजस्थान में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस



3. नई खनिज नीति की आवश्यकता


4. राजस्थान के खनिज क्षेत्र की दृष्टि


5. लक्ष्य


6. नीति के प्रमुख बिंदु

6.1. खनिज प्रबंधन

6.2. तकनीकी नवाचार

6.3. सतत खनन और ESG मानक

6.4. कौशल उन्नयन और सामुदायिक भागीदारी

6.5. रणनीतिक और महत्वपूर्ण खनिज

6.6. राज्य खनन कंपनियां

6.7. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस



7. क्रियान्वयन और समीक्षा




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1. भूमिका

राजस्थान भारत के सबसे खनिज संपन्न राज्यों में से एक है, जहां विभिन्न प्रकार के खनिज उपलब्ध हैं। राज्य में 22 प्रमुख खनिज और 36 लघु खनिज उत्पादित किए जाते हैं। राजस्थान देश का एकमात्र उत्पादक है सीसा (Lead), जस्ता (Zinc), वोलास्टोनाइट (Wollastonite), सेलेनाइट (Selenite), कैल्साइट (Calcite) और जिप्सम (Gypsum) का।

खनिज खनन की गतिविधियां राज्य के 0.68% क्षेत्रफल में फैली हुई हैं। वर्तमान में राजस्थान में 148 प्रमुख खनिजों के खनन पट्टे, 16,817 लघु खनिज खनन पट्टे और 17,454 खदान लाइसेंस जारी किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में, राजस्थान में खनिजों से कुल राजस्व ₹7,491 करोड़ था, जो राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 3.4% था। इस क्षेत्र ने लगभग 35 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान किया है।


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2. पृष्ठभूमि

2.1. खनिज अन्वेषण एवं खोज

राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किमी है, जिसमें से:

2,18,000 वर्ग किमी क्षेत्र में क्षेत्रीय खनिज सर्वेक्षण किया गया है।

25,600 वर्ग किमी क्षेत्र में क्षेत्रीय भूवैज्ञानिक मानचित्रण (RGM) किया गया है।

5,150 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत भूवैज्ञानिक मानचित्रण (DGM) किया गया है।


2.2. राजस्थान में प्रमुख खनिज

राजस्थान में निम्नलिखित प्रमुख खनिज उत्पादित होते हैं:

**सीसा (Lead)

जस्ता (Zinc)

तांबा (Copper)

चांदी (Silver)

लिग्नाइट (Lignite)

चूना पत्थर (Limestone)

लौह अयस्क (Iron Ore)**


इसके अलावा, राजस्थान में सोना (Gold), पोटाश (Potash), दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earth Elements - REE), टंगस्टन (Tungsten) और लिथियम (Lithium) जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के भी संभावित भंडार हैं।

2.3. राजस्थान में लघु खनिज

राजस्थान में निम्नलिखित लघु खनिजों का उत्पादन किया जाता है:

ग्रेनाइट (Granite)

मार्बल (Marble)

बलुआ पत्थर (Sandstone)

मैसोनरी स्टोन (Masonry Stone)

बजरी (Bajri)

फेल्डस्पार (Feldspar)

चाइना क्ले (China Clay)


2.4. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

राजस्थान देश में ऑनशोर कच्चे तेल (Onshore Crude Oil) उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है। राज्य में 13 पेट्रोलियम खनन पट्टे (PML) और 14 पेट्रोलियम अन्वेषण लाइसेंस (PEL) जारी किए गए हैं।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में, इस क्षेत्र से राज्य को ₹3,425 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। राजस्थान की तेल उत्पादन क्षमता 70,000 से 78,000 बैरल प्रति दिन और प्राकृतिक गैस उत्पादन 3.3 से 3.4 मिलियन घन मीटर प्रति दिन है।


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3. नई खनिज नीति की आवश्यकता

नई नीति की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:

1. खनिज नीलामी प्रक्रिया को सरल बनाना


2. खनिज संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना


3. नवीन तकनीकों को अपनाना


4. नए रोजगार अवसरों का सृजन करना


5. पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानकों को अपनाना




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4. राजस्थान के खनिज क्षेत्र की दृष्टि

राजस्थान को भारत के अग्रणी खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल करना और तकनीकी नवाचारों व सतत खनन के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाना।


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5. लक्ष्य

1. खनिज खनन क्षेत्र को 0.68% से बढ़ाकर 2.0% करना


2. खनिज उत्पादन की संख्या 58 से बढ़ाकर 70 करना


3. 50 प्रमुख खनिज ब्लॉकों की नीलामी


4. 50 लाख रोजगार (2029-30) और 1 करोड़ रोजगार (2047)


5. राज्य के खनिज क्षेत्र से राजस्व को तीन गुना बढ़ाकर ₹1 लाख करोड़ करना



(आगे जारी...)


6. नीति की प्रमुख विशेषताएँ

6.1. खनिज प्रबंधन

इस नीति का उद्देश्य खनिज क्षेत्र को पारदर्शी, कुशल और सतत बनाने के लिए सुधारों को लागू करना है।

6.1.1. खनिज खोज और अन्वेषण को तेज करना

लक्ष्य: खनिज खनन क्षेत्र को हर वर्ष 1% तक बढ़ाना।

कार्रवाई योजना:

  1. निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अन्वेषण लाइसेंस (Exploration License) प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करना।
  2. राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (NMET) और राजस्थान खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (RSMET) से वित्त पोषण प्राप्त कर उन्नत तकनीकों का उपयोग करना।
  3. खनिज डेटा को राष्ट्रीय भू-विज्ञान डेटा भंडार (NGDR) में मानकीकृत करना।
  4. राजस्व विभाग के साथ मिलकर खनिज क्षेत्रों को "खनन भूमि" या "खनिज संभावित भूमि" के रूप में चिह्नित करना
6.1.2. खनन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना

लक्ष्य: खनिज क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना और खनन नियमों को सरल बनाना।

कार्रवाई योजना:

  1. पूर्व-स्वीकृत मंजूरी (Pre-Embedded Clearances) के साथ खनिज ब्लॉकों की नीलामी करना ताकि खनन कार्य शीघ्र शुरू हो सके।
  2. जनजातीय क्षेत्रों में बोली सुरक्षा राशि को घटाकर ₹5 लाख करना जिससे स्थानीय उद्यमी भाग ले सकें।
  3. सरकारी भूमि पर स्थित छोटे खनिज क्षेत्रों का खनन करने के लिए संबंधित किसानों को प्राथमिकता देना।
6.1.3. अवैध खनन और खनिज परिवहन को रोकना

लक्ष्य: प्रौद्योगिकी और संस्थागत तंत्र का उपयोग कर अवैध खनन को नियंत्रित करना।

कार्रवाई योजना:

  1. जीपीएस-आधारित वाहन ट्रैकिंग और RFID तकनीक का उपयोग कर खनिज परिवहन पर निगरानी रखना।
  2. माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (MSS) लागू करना, जो उपग्रह इमेजरी और भू-स्थानिक सूचना का उपयोग करता है।
  3. ड्रोन सर्वेक्षण अनिवार्य करना ताकि खदानों के संचालन की सटीक निगरानी की जा सके।
  4. ई-रवन्ना प्रणाली लागू करना ताकि अवैध खनन से जब्त खनिजों की बिक्री पारदर्शी हो।

6.2. तकनीकी नवाचार और स्वचालन

6.2.1. खनिज मूल्य श्रृंखला को उन्नत करना

लक्ष्य: आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खनिज संसाधनों का कुशल दोहन करना।

कार्रवाई योजना:

  1. खनिज सर्वेक्षण और योजना बनाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना।
  2. खनिज क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देना ताकि नई खोज और खनिज प्रसंस्करण में सुधार हो।
  3. खनिज अवशेषों (टेलिंग) से धातुओं और अन्य उपयोगी सामग्री निकालने की तकनीकों को अपनाना।
6.2.2. फेसलेस गवर्नेंस की ओर बढ़ना

लक्ष्य: डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खनिज प्रशासन को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना।

कार्रवाई योजना:

  1. खनन डेटा प्रबंधन के लिए "DMG-OMS" पोर्टल को उन्नत करना ताकि सभी उपयोगकर्ता ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सकें।
  2. खनन से जुड़ी सभी जानकारी को "जन सूचना पोर्टल" पर उपलब्ध कराना।
  3. शिकायत निवारण के लिए टिकट-आधारित प्रणाली लागू करना।

6.3. सतत खनन और ESG मानक

6.3.1. शून्य-अपशिष्ट खनन (Zero-Waste Mining)

लक्ष्य: खनन अवशेषों के पुन: उपयोग को बढ़ावा देकर अपशिष्ट प्रबंधन को कुशल बनाना।

कार्रवाई योजना:

  1. खनन योजना में अपशिष्ट प्रबंधन और शून्य-अपशिष्ट खनन को अनिवार्य करना।
  2. सरकारी भूमि पर जमा खनन अवशेषों (Overburden Dumps) की ई-नीलामी करना।
  3. निजी भूमि मालिकों को भी खनन अवशेषों का निस्तारण करने की अनुमति देना।
6.3.2. ESG मानकों का अनुपालन

लक्ष्य: राजस्थान को सतत खनन का नेतृत्वकर्ता बनाना।

कार्रवाई योजना:

  1. प्रमुख खनिजों की तरह लघु खनिज पट्टों के लिए भी "STAR Rating Framework" लागू करना।
  2. खनन क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण उपायों को लागू करना।
  3. स्थानीय समुदायों को सतत खनन के बारे में जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित करना।

6.4. कौशल उन्नयन और सामुदायिक भागीदारी

6.4.1. कौशल विकास और रोजगार सृजन

लक्ष्य: राजस्थान में खनन क्षेत्र के विकास के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाना।

कार्रवाई योजना:

  1. खनन प्रभावित क्षेत्रों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) की स्थापना और उन्नयन करना।
  2. खनन क्षेत्रों के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू करना।
  3. खनन क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने के लिए स्टडी टूर और ऑन-साइट ट्रेनिंग देना।
6.4.2. खदान श्रमिकों का कल्याण और सुरक्षा

लक्ष्य: खदान श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना।

कार्रवाई योजना:

  1. सिलिकोसिस जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाना।
  2. खनन क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करना।
  3. स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देना ताकि वैकल्पिक रोजगार के अवसर मिल सकें।

6.5. रणनीतिक और महत्वपूर्ण खनिज

लक्ष्य: राजस्थान को महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बनाना।

कार्रवाई योजना:

  1. केंद्र सरकार के सहयोग से महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी करना।
  2. "राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) 2024" के तहत महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करना।

7. क्रियान्वयन और समीक्षा

राजस्थान सरकार इस नीति के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए "प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU)" स्थापित करेगी।

  1. राज्य स्तर पर एक समिति बनाई जाएगी जो नीति के लक्ष्यों की निगरानी करेगी।
  2. हर तिमाही समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि आवश्यकतानुसार सुधार किए जा सकें।
  3. खनिज विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में इस नीति की प्रगति को शामिल किया जाएगा।

निष्कर्ष

राजस्थान खनिज नीति 2024 राज्य के खनिज संसाधनों के सतत, पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नीति का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और राज्य की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना है।