बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र की नदियां और उनके उद्गम स्थल एव अंत स्थल


बंगाल की खाड़ी अपवाह  तंत्र

दी का नाम

उद्गम स्थल

अंत स्थल

चंबल

जानापाव पहाड़ी (म.प्र.)

मुरादगंज (उत्तरप्रदेश-यमुना)

बामनी

हरिपुरा गाँव (चित्तौड़)

भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़-चम्बल)

मेज

बिजौलिया (भीलवाड़ा)

कोटा-बूंदी सीमा (चम्बल)

कुराल

ऊपरमाल (भीलवाड़ा)

कोटा-बूंदी सीमा (चम्बल)

मांगली

भीलवाड़ा

सांगवाड़ा (बूंदी-मेज)

कालीसिंध

बागली (मध्यप्रदेश)

नानेरा (कोटा- चम्बल)

घोड़ा पछाड़

बिजौलिया

सांगवाड़ा (बूंदी-मांगली)

परवन

मध्यप्रदेश

पलायता (बारां की सीमा पर चम्बल)

निमाज

राजगढ़ (मध्यप्रदेश)

अकलेरा (झालावाड़-परवन)

अहु

सुसनेर (मध्यप्रदेश)

गागरोन (झालावाड़-कालीसिंध)

पिपलाज

पंच पहाड़ (झालावाड़)

चोखेरी (झालावाड़-आहु)

पार्वती

सीहोर (मध्य प्रदेश)

पाल घाट (से. माधोपुर-चम्बल )

कुनू

गुना (मध्यप्रदेश)

करौली सीमा (चम्बल)

बनास

खमनौर (राजसमंद)

रामेश्वर (स. माधोपुर-चम्बल)

बेड़च

गोगुन्दा (उदयपुर)

बीगोद (भीलवाड़ा-बनास )

गंभीर

करौली

मैनपुरी (उत्तरप्रदेश-यमुना)

मेना

गुजाली

अरनिया गाँव (चितौड़-चम्बल )

चाकण

बूंदी

करमापुरा (सवाई माधोपुर - चम्बल )

बान्द्राभागा

सेमली (झालावाड़)

खाड़िया (झालावाड़-कालीसिंध )

गंभीरी

जावट (मध्यप्रदेश)

चटियावाली (चित्तौड-बेड़च)

मेनाल

मांडल (चित्तौड़गढ़)

बीगोद (भीलवाड़ा-बनास )

कोठारी

दिवेर (राजग मंद)

नंदराय (भीलवाड़ा-बनास )

खारी

बिजराल (राजसमंद)

राजमहल के निकट (टोंक-बनास)

डाई

अजमेर

राजमहल के निकट (टोंक-बनास)

मांसी

सिलोरा (अजमेर)

देवधाम (टोंक-बनास )

मोरेल

एन

चैनपुरा गाँव (जयपुर ग्रा.)

ढूंढ नदी

अचरोल (जयपुर ग्रा.)

लालसोट (दौसा-मोरेल )

सहोदरा

अराय गांव (अजमेर)

टोंक (मासी नदी)

कालीसिल

सपोटरा (करौली)

हाड़ौती (करौली-मोरेल+बनास)

बांडी

जयपुर

देवधाम (टोंक - बनास नदी)

पार्वती-2

छावर गाँव (करौली)

राजाखेड़ा (धौलपुर-गंभीरी )

बाणगंगा

बैराठ (कोटपुतली बहरोड़)

फतेहाबाद (उत्तरप्रदेश-यमुना).

यह डेटा निम्नलिखित के लिए उपयोगी हो सकता है:

  • भूगोल: राजस्थान और मध्य प्रदेश के नदी तंत्र को समझने में मदद करता है।

  • जल संसाधन: इन क्षेत्रों में जल संसाधनों के वितरण के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

  • सिंचाई: इन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए उपलब्ध जल स्रोतों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

  • पर्यावरण अध्ययन: इन क्षेत्रों की पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

  • इतिहास: इन नदियों के किनारे बसे हुए शहरों और कस्बों के इतिहास को समझने में मदद करता है।